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Nirjala Ekadashi 2026 Parana Time आज 26 May से शुरू होकर 27 May की सुबह 5:25 से 8:10 बजे तक पारण मुहूर्त। ढाई घंटे की खिड़की चूकी तो साल भर का पुण्य अधूरा। पूरी Vrat Vidhi और भीमसेनी कहानी जानिए।
Nirjala Ekadashi 2026 Parana Time को लेकर देशभर के व्रती आज सुबह से ही पंचांग खंगाल रहे हैं। आज 26 May 2026 को पड़ रहा यह व्रत हिंदू कैलेंडर का सबसे कठिन उपवास माना जाता है, क्योंकि इसमें दिनभर एक बूंद पानी भी नहीं पिया जाता। और जो लोग पूरी श्रद्धा से यह व्रत रखते हैं, उन्हें साल भर के सारे एकादशियों का फल एक ही दिन में मिल जाता है।
लेकिन व्रत खोलने का सही समय न पता हो तो पूरी तपस्या बेकार जा सकती है। यही वजह है कि Nirjala Ekadashi 2026 Parana Time को लेकर सोशल मीडिया पर भूचाल मचा हुआ है। पंडित बार-बार चेता रहे हैं कि पारण की 2 घंटे 45 मिनट की खिड़की चूकी, तो व्रत का पुण्य अधूरा रह जाएगा।
पंचांग की मानें तो एकादशी तिथि 26 May को सुबह 10:49 बजे शुरू हुई और 27 May को सुबह 8:44 बजे समाप्त होगी। यानी व्रत आज सुबह से रखा जाएगा और कल यानी द्वादशी (27 May) के दिन तोड़ा जाएगा।
लेकिन यहां एक पेच है। द्रिक पंचांग के अनुसार पारण का सही मुहूर्त 27 May 2026 की सुबह 5:25 से 8:10 बजे तक है। बस ढाई घंटे की खिड़की। द्वादशी तिथि 28 May की सुबह 6:04 बजे खत्म हो रही है, इसलिए हरि वासर के बाद ही व्रत खोलना शास्त्र सम्मत है। देर की तो दोष लगेगा।
महर्षि वेद व्यास के अनुसार, महाभारत काल में भीम से व्रत-उपवास नहीं हो पाता था। उन्होंने व्यास जी से उपाय पूछा तो जवाब मिला एक ही एकादशी रख लो जो साल भर के बराबर फल देगी। बस, उसी दिन से इस व्रत का नाम भीमसेनी एकादशी पड़ा। जेठ महीने की चिलचिलाती गर्मी में बिना पानी का व्रत रखना भीम जैसे पहलवान के लिए भी आसान नहीं था, यहां तक कि वह बेहोश होने के कगार पर पहुंच गए थे।
और शायद यही वजह है कि आज भी Nirjala Ekadashi 2026 Parana Time को लेकर लोग इतने सतर्क रहते हैं। एक भी नियम चूका तो पूरी तपस्या व्यर्थ।
व्रत असल में दशमी (कल यानी 25 May) की शाम से ही शुरू हो जाता है। नीचे दिए स्टेप शास्त्र सम्मत हैं:
सबसे बड़ी चेतावनी? पूरे दिन एक बूंद पानी नहीं। कुल्ला भी नहीं। यही इस व्रत को बाकी 23 एकादशियों से अलग बनाता है।
कई व्रती बेखबर होकर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनसे Nirjala Ekadashi 2026 का फल अधूरा रह जाता है। पंडितों ने जो सूची दी है वो कुछ ऐसी है: दिन में सोना मना, क्रोध करना मना, चावल या तामसिक भोजन घर में पकाना मना, झूठ बोलना मना, और सबसे जरूरी, पारण मुहूर्त से पहले या बाद में व्रत तोड़ना बिल्कुल मना।
याद रखिए, द्वादशी के दिन भी पारण के बाद चावल खाने की मनाही है। तुलसी पत्र अर्पित करने के बाद ही ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर भोजन ग्रहण करें। और सबसे पहले गरीब या ब्राह्मण को खिलाकर खुद खाएं, यही व्रत का असली पुण्य है।
क्या आप इस साल Nirjala Ekadashi 2026 Parana Time पर व्रत रख रहे हैं? कमेंट में बताइए, और साथ ही पढ़िए हमारे trending सेक्शन में और भी ताजा खबरें। ज्यादा डिटेल के लिए Drik Panchang भी देख सकते हैं।
Image credit: Smart Puja. Source: smartpuja.com

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