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RBI Gold Reserve June 2026 पर विदेशी रिपोर्ट का दावा कि RBI ने 12 अरब डॉलर का सोना बेचा। PIB ने इसे खारिज किया, बताया गोल्ड की हिस्सेदारी 16.7% तक बढ़ी। जानिए 880 टन सोने का पूरा गणित।
RBI Gold Reserve June 2026 को लेकर इस वक्त देश में जबरदस्त बवाल मचा हुआ है। एक विदेशी रिसर्च रिपोर्ट ने दावा कर दिया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने गिरते रुपये को संभालने के लिए चुपके से करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेच डाला। लेकिन सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी PIB ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।
दरअसल झगड़ा शुरू हुआ एक ग्लोबल रिसर्च रिपोर्ट से, जिसने 2 जून 2026 को कहा कि RBI ने डॉलर की कमी पूरी करने और रुपये को सहारा देने के लिए अपने सोने के भंडार में कटौती की है। खबर आते ही सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ आ गई कि क्या वाकई देश का सोना बेचा जा रहा है। यहीं से RBI Gold Reserve June 2026 का मुद्दा ट्रेंड करने लगा।
RBI के अपने आंकड़े इस दावे की हवा निकाल देते हैं। मार्च 2026 तक भारत के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था। इतना ही नहीं, कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा सितंबर 2025 के 13.92% से बढ़कर मार्च 2026 तक करीब 16.7% पहुंच गया। यानी सोना घटा नहीं, बल्कि उसका वजन और बढ़ा है। अगर RBI सच में 12 अरब डॉलर का सोना बेचता, तो यह हिस्सेदारी गिरनी चाहिए थी, चढ़नी नहीं।
सरकार की प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने साफ कहा कि RBI के पास उपलब्ध डेटा सोने की बिकवाली नहीं, बल्कि उसकी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी दिखाता है। PIB के मुताबिक विदेशी रिपोर्ट का गणित ही गलत बैठा। एक और दिलचस्प बात यह है कि अब भारत का 77% सोना देश के भीतर ही रखा जा रहा है, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 59.2% था। मतलब RBI सोना बेच नहीं, बल्कि उसे विदेश से वापस मंगाकर घर में जमा कर रहा है।
यह पूरा विवाद ऐसे वक्त उठा जब रुपया दबाव में है। 22 मई 2026 को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 681.4 अरब डॉलर रह गया, जो एक हफ्ते में 7.5 अरब डॉलर की तेज गिरावट थी। ग्लोबल ऑयल झटकों और विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच RBI रुपये को संभालने में जुटा है। लेकिन फॉरेक्स में गिरावट का मतलब यह कतई नहीं कि सोना बेचा गया, यही बात इस बहस का सबसे अहम पेच है।
आपको लग सकता है कि सेंट्रल बैंक के सोने का आपकी जेब से क्या लेना-देना? लेकिन सच यह है कि देश का गोल्ड रिज़र्व जितना मजबूत होगा, रुपये पर भरोसा उतना पक्का रहेगा और महंगाई व इंपोर्ट बिल का दबाव उतना कम। जब RBI सोना खरीदता है तो वह डॉलर पर निर्भरता घटाकर अर्थव्यवस्था को एक सुरक्षा कवच देता है। इसलिए RBI Gold Reserve June 2026 की यह खबर सिर्फ बैंकरों की नहीं, हर आम भारतीय की चिंता है।
RBI का सोना खरीदना कोई नई बात नहीं है। बीते कुछ सालों में केंद्रीय बैंक लगातार अपना गोल्ड भंडार बढ़ा रहा है और एक वित्त वर्ष में करीब 57.5 टन तक सोना जोड़ चुका है, जो सात साल में दूसरी सबसे बड़ी खरीद रही। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक इस वक्त डॉलर पर निर्भरता घटाने और जियो-पॉलिटिकल जोखिम से बचने के लिए सोने की ओर लौट रहे हैं। भारत भी ठीक इसी रणनीति पर चल रहा है, ताकि किसी भी ग्लोबल झटके में देश की तिजोरी मजबूत बनी रहे। यही वजह है कि RBI Gold Reserve June 2026 को लेकर बिकवाली का दावा अर्थशास्त्रियों को भी हजम नहीं हुआ।
बड़ी बात यह है कि सोने की कीमतों में तेजी के इस दौर में RBI का गोल्ड पर भरोसा और गहरा हुआ है। ऐसे ही अपडेट के लिए हमारे बिज़नेस सेक्शन पर नज़र बनाए रखें। वहीं इस पूरे मामले पर PIB की सफाई आप The Tribune की रिपोर्ट में विस्तार से पढ़ सकते हैं।
क्या आपको लगता है कि RBI को अपना सोने का भंडार और बढ़ाना चाहिए, या फॉरेक्स रिज़र्व बचाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए? कमेंट में अपनी बेबाक राय जरूर बताइए।
Image credit: Wikimedia Commons (Gold ingot and bar of Banque de France). Source: commons.wikimedia.org

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