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Onion Price Crash Maharashtra May 2026 की पूरी कहानी — Satana से Solapur तक मंडियों में प्याज ₹50/क्विंटल पर पहुंच गया, किसानों ने ₹1500 सब्सिडी की मांग की।
Onion Price Crash Maharashtra May 2026 ने राज्य के किसानों की कमर तोड़ दी है। महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज ₹50 प्रति क्विंटल तक गिर चुका है — ये वो दाम है जिस पर खर्च तो छोड़ो, मंडी तक प्याज ले जाने का भाड़ा भी नहीं निकलता। नासिक के सतना मंडी में 9 मई 2026 को रिकॉर्ड लो दर्ज हुआ। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान महासंघ का दावा है कि अब तक राज्य के किसानों को ₹4,000 से ₹5,000 करोड़ का सीधा घाटा हो चुका है।
9 मई 2026 की एक रिपोर्ट में बीड जिले के एक किसान ने बताया कि उन्होंने सोलापुर मंडी में 41 बोरी प्याज ले जाकर सिर्फ 20 बोरी बेच पाए, और हाथ में आए मात्र ₹519। बाकी 21 बोरी को वापस ले जाने का खर्च भी नहीं था। यह कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं है — महाराष्ट्र की लगभग हर बड़ी मंडी की हकीकत यही है।
इस संकट का असर सबसे ज़्यादा तीन प्रमुख मंडियों पर है। नासिक की सतना मंडी में 9 मई 2026 को न्यूनतम दाम ₹50/क्विंटल दर्ज हुआ। बीड जिले की सोलापुर मंडी में औसत दाम ₹100-₹150/क्विंटल पर अटका है। छत्रपति संभाजीनगर जिले की वैजापुर APMC में भी हालात बहुत अलग नहीं हैं। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 में जो प्याज ₹3,500/क्विंटल बिक रहा था, वो अब गिरकर ₹800-₹1,200/क्विंटल पर आ गया है।
किसानों की प्रोडक्शन कॉस्ट औसतन ₹2,200-₹2,500/क्विंटल है। मतलब साफ है — हर क्विंटल बेचने पर किसान को सीधा घाटा हो रहा है। कई किसान कह रहे हैं कि “खेत में प्याज़ सड़ने देना बेचने से बेहतर है।”
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान महासंघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने बताया कि इस संकट की तीन मुख्य वजहें हैं। पहली — 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी के कारण भारतीय प्याज़ इंटरनेशनल मार्केट में महंगा हो गया। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश इस मौके का फायदा उठाकर भारत के पुराने खरीदार देशों को अपना प्याज़ बेच रहे हैं।
दूसरी वजह — सरकार की ओर से प्याज़ की procurement नहीं हो रही, जबकि NAFED और NCCF दोनों एजेंसियों के पास खरीद की पावर है। तीसरी वजह — irregular import licences बंट रहे हैं जो घरेलू कीमतों को artificially नीचे रखते हैं। दिघोले का आरोप है कि यह सब किसी न किसी चुनावी दबाव में हो रहा है।
महासंघ ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के सामने पांच ठोस मांगें रखी हैं। ये मांगें 9 मई 2026 की प्रेस रिलीज़ में औपचारिक रूप से दर्ज की गईं।
पहली — हर किसान को ₹1,500 प्रति क्विंटल की डायरेक्ट सब्सिडी। दूसरी — एक्सपोर्ट ड्यूटी पर तत्काल रोक हटाई जाए। तीसरी — APMC में लगने वाले गैरकानूनी कमीशन और कटौती पर सख्त कार्रवाई हो। चौथी — किसानों को direct consumer market access मिले ताकि बिचौलियों का चक्कर खत्म हो। पांचवी — सरकार प्याज़ के लिए guaranteed minimum price घोषित करे। दिघोले ने साफ कहा कि “अगर तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राज्यव्यापी किसान आंदोलन शुरू होगा, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी सरकार पर होगी।”
एक तरफ किसान घाटे में हैं, दूसरी तरफ शहरी उपभोक्ता को मंडी की कीमतों का पूरा फायदा नहीं मिल रहा। मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में रिटेल प्याज़ अभी भी ₹25-₹35/किलो बिक रहा है। मतलब, मंडी में जो प्याज़ ₹50/क्विंटल यानी ₹0.50/किलो बिक रहा है, वो उपभोक्ता तक 50 गुना महंगा पहुंच रहा है।
यह gap बिचौलियों, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट और रिटेल मार्जिन में जा रहा है। इसी वजह से किसानों की चौथी मांग — direct consumer access — सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर farm-to-fork model लागू होता है तो उपभोक्ता को सस्ता प्याज़ मिलेगा और किसान को भी सही दाम।
केंद्र सरकार के पास तीन तत्काल ऑप्शन हैं। पहला — NAFED और NCCF के ज़रिए MSP पर खरीद शुरू करना। 2023 में सरकार ने इसी तरह 2.5 लाख टन प्याज़ खरीदा था जिससे दाम स्थिर हुए थे। दूसरा — एक्सपोर्ट ड्यूटी 20% से घटाकर 5% या शून्य करना ताकि भारतीय प्याज़ ग्लोबल मार्केट में फिर से competitive हो। तीसरा — Maharashtra Industrial Subsidy (MIS) स्कीम के तहत direct cash transfer।
हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई official बयान नहीं आया है। किसान संगठन अगले 7 दिनों के अंदर जवाब चाहते हैं। अगर इस बीच कोई फैसला नहीं हुआ, तो मई के अंत तक राज्यव्यापी आंदोलन तय माना जा रहा है। पंजाब और हरियाणा के किसान संगठन भी solidarity में आ सकते हैं।
यह सिर्फ़ प्याज़ की कहानी नहीं — यह भारत के agricultural pricing system की कहानी है, जहां किसान को उसकी मेहनत का दाम नहीं मिलता और उपभोक्ता को सस्ता सामान नहीं। पूरी जानकारी के लिए Down To Earth की डिटेल रिपोर्ट देखें। मंडी से जुड़ी और ख़बरों के लिए हमारा Business सेक्शन ज़रूर पढ़ें।
Image credit: Down To Earth. Source: downtoearth.org.in
क्या ₹1,500/क्विंटल की सब्सिडी प्याज़ किसानों के लिए सही समाधान है, या सरकार को MSP और direct consumer access पर फोकस करना चाहिए? कमेंट में अपनी राय बताएं।

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