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Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse: भागलपुर में गंगा पर बना विक्रमशिला सेतु का 133 नंबर पिलर रविवार रात ध्वस्त, 33 मीटर पुल गंगा में समाया। मरम्मत में 15-20 दिन, 12 करोड़ खर्च का अनुमान।
Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse — बिहार की लाइफलाइन कही जाने वाली विक्रमशिला सेतु का 133 नंबर पिलर रविवार देर रात गंगा नदी में समा गया। भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले इस पुल के लगभग 33 मीटर हिस्से के ध्वस्त होने से पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। हादसा रात 11:55 बजे शुरू हुआ और 1:07 बजे तक पुल का स्लैब पूरी तरह गंगा में समा गया। गनीमत रही कि पुलिस ने समय रहते वाहनों की आवाजाही रोक दी, जिससे जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ।
यह विक्रमशिला सेतु पिलर 133 कोलैप्स बिहार के पुल निर्माण और रखरखाव पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। पिछले दो साल में बिहार में कई पुल गिरे हैं — और अधिक संदर्भ के लिए हमारी न्यूज़ कवरेज देख सकते हैं। भागलपुर का यह पुल नॉर्थ-ईस्ट कनेक्टिविटी का सबसे अहम लिंक था। इसके बंद होते ही पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज की ओर जाने वाले हजारों यात्री और ट्रक फंस गए हैं। Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse से सीधा असर लाखों यात्रियों पर पड़ा है।
घटना की शुरुआत रविवार रात 11:55 बजे हुई जब पिलर 133 बैठने लगा। सेतु पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत वरीय अधिकारियों को सूचना दी और प्रभावित हिस्से को खाली कराया। ठीक 1 घंटा 12 मिनट बाद, यानी सोमवार तड़के 1:07 बजे, पिलर पूरी तरह ध्वस्त होकर गंगा में समा गया। इंजीनियरों के अनुसार पुल का करीब 33 मीटर हिस्सा गंगा नदी में चला गया है। यह Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse पिछले दशक की सबसे बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर विफलताओं में गिनी जाएगी।
रेंज आईजी विवेक कुमार ने एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और नवगछिया एसपी राजेश कुमार को तत्काल ट्रैफिक रोकने का निर्देश दिया। भारी वाहनों को घोघा, सबौर, जगदीशपुर और केजरेली में रोक दिया गया। शहर के अंदर यातायात पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। बिहार के अन्य ज़रूरी अपडेट्स के लिए ट्रेंडिंग सेक्शन देखिए।
विक्रमशिला सेतु बिहार का दूसरा सबसे लंबा पुल है और 2001 में चालू हुआ था। यह भागलपुर को नवगछिया से जोड़ता है और पूर्णिया-किशनगंज होकर पूर्वोत्तर भारत तक पहुंच प्रदान करता है। पिछली बार 2016 में इसकी मरम्मत हुई थी जब सभी पिलरों की बियरिंग बदली गई थी। चौथे और पांचवें पिलर की दरारों में कार्बन प्लेट चिपकाई गई थी।
मुंबई की रोहरा रीबिल्ड एसोसिएट्स को चार साल का मेंटेनेंस ठेका मिला था। लेकिन 2020-21 के बाद नियमित निरीक्षण और देखभाल में लापरवाही बरती गई। यही लापरवाही आज Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse की वजह बनी। आरसीडी (RCD) ने वित्त विभाग से 12 करोड़ का प्राक्कलन भेज कर तत्काल मरम्मत की अनुमति मांगी है।
अधिकारियों के अनुसार पुल की मरम्मत बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि क्षतिग्रस्त हिस्सा गंगा की मुख्य धारा में है। पुल निर्माण से जुड़े इंजीनियरों ने कहा कि पूरी तरह दुरुस्त करने में 15 से 20 दिन लग सकते हैं। मानसून शुरू होने से पहले काम पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि बारिश के बाद गंगा में पानी का बहाव और तेज हो जाएगा।
इस Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse से बिहार सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान होगा। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार पुल बंद होने से प्रति दिन करीब 8-10 हजार वाहन डायवर्ट हो रहे हैं। फल-सब्जी और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई में 4-6 घंटे की देरी हो रही है। बिहार सरकार ने आपातकालीन समिति बनाकर रोज़ाना समीक्षा शुरू की है।
Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse के बाद नवगछिया, खगड़िया, पूर्णिया से भागलपुर आने-जाने वाले यात्रियों को मुंगेर पुल के रास्ते 60-80 किलोमीटर अधिक यात्रा करनी पड़ रही है। एंबुलेंस सेवा और मेडिकल इमरजेंसी के लिए भी प्रशासन ने वैकल्पिक रूट तैयार किया है। राज्य सरकार ने भारी वाहनों के लिए 24 घंटे ट्रैफिक हेल्पलाइन शुरू की है।
स्थानीय व्यापार पर भी इसका सीधा असर दिख रहा है। भागलपुर के सिल्क व्यापारी जो बंगाल और असम तक माल भेजते हैं, उन्हें अगले 15-20 दिन में करोड़ों का नुकसान होने का अनुमान है। यह घटना याद दिलाती है कि बिहार में पुल और सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर का नियमित ऑडिट कितना जरूरी है। राज्य के अन्य पुलों — महात्मा गांधी सेतु, कोसी पुल और गंडक पुल — का तुरंत ऑडिट किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse एक चेतावनी है। केंद्र सरकार से Disaster Relief Fund की मांग भी की गई है ताकि स्थायी समाधान किया जा सके।
क्या Vikramshila Setu Pillar 133 Collapse एक बड़ी निर्माण लापरवाही का नतीजा है? कमेंट में बताइए। बिहार के पुल हादसों पर विस्तार से पढ़ने के लिए Mint की रिपोर्ट देखें। Image credit: Mint. Source: livemint.com

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