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आज 27 मई को पद्मिनी एकादशी है, जो हर 32 महीने में सिर्फ एक बार आती है। जानिए Padmini Ekadashi 2026 Parana Time, व्रत की सही तिथि और वो कथा जिसमें रावण को हराने वाले योद्धा का जन्म हुआ।
Padmini Ekadashi 2026 Parana Time को लेकर आज पूरे देश में सर्च तूफान मचा है, और वजह भी बड़ी है। ये वो एकादशी है जो हर साल नहीं, बल्कि हर 32 महीने में सिर्फ एक बार आती है। आज बुधवार, 27 मई 2026 को रखा जा रहा ये व्रत अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास का सबसे दुर्लभ संयोग लेकर आया है, जिसका फल सामान्य एकादशी से कई गुना ज्यादा माना जाता है।
लेकिन असली पंगा यहीं है, जो ज्यादातर लोग गड़बड़ कर देते हैं, वो है व्रत खोलने का सही समय। पारण गलत वक्त पर किया तो पूरे दिन की तपस्या अधूरी मानी जाती है। इसलिए तिथि, पूजा विधि और पारण का मुहूर्त, तीनों एक साथ समझना जरूरी है।
व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में ही होता है, इसीलिए Padmini Ekadashi 2026 Parana Time 28 मई 2026 को सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे के बीच बताया गया है। यानी जो भक्त आज 27 मई को निर्जला या फलाहारी व्रत रख रहे हैं, वे कल सूर्योदय के बाद इसी विंडो में स्नान करके भगवान विष्णु को भोग लगाकर व्रत खोलेंगे।
एकादशी तिथि की बात करें तो ये 26 मई की सुबह लगभग 5:10 बजे शुरू हुई और 27 मई की सुबह करीब 6:21 बजे समाप्त होगी। चूंकि उदयातिथि 27 मई को मिल रही है, इसलिए गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए व्रत आज ही मान्य है। देरी की कोई गुंजाइश नहीं।
पद्मिनी एकादशी सिर्फ अधिक मास में आती है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। हिंदू पंचांग को सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच तालमेल बैठाने के लिए हर लगभग 32 से 33 महीने में एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ा जाता है, और यही अधिक मास कहलाता है।
इसी अतिरिक्त महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दुर्लभ दिन की गई हर पूजा, जप और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। यही वजह है कि Padmini Ekadashi 2026 Parana Time और व्रत को लेकर श्रद्धालुओं में इतना उत्साह है। अगला मौका अब सीधे ढाई साल से ज्यादा इंतजार के बाद आएगा।
कथा महिष्मती नगरी के राजा कृतवीर्य से जुड़ी है। राजा और उनकी पत्नी पद्मिनी, जो राजा हरिश्चंद्र की पुत्री थीं, संतान सुख के लिए हजारों वर्ष कठोर तप करते रहे, पर कोई फल नहीं मिला। निराश पद्मिनी आखिरकार महासती अनुसूया के पास पहुंचीं।
अनुसूया ने उन्हें बताया कि हर 32 महीने में आने वाले अधिक मास की दो एकादशियों का व्रत पूरी श्रद्धा और रात्रि जागरण के साथ करो। पद्मिनी ने वैसा ही किया। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और ऐसा पुत्र होने का वरदान दिया जो देवताओं, दानवों और मनुष्यों, सबके लिए अजेय हो। यही पुत्र आगे चलकर कार्तवीर्य अर्जुन बना, जिसने अपने पराक्रम से रावण तक को बंदी बना लिया था। इसीलिए ये व्रत आज भी संतान, सौभाग्य और पाप नाश का सबसे बड़ा दांव माना जाता है।
व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु की तुलसी दल, फूल, धूप और दीप से पूजा करें। दिनभर अन्न का त्याग रखें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। रात में सोने के बजाय जागरण और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है।
अगर आप व्रत-त्योहारों की सटीक तिथियां ट्रैक करना चाहते हैं तो हमारे ट्रेंडिंग सेक्शन पर नजर बनाए रखिए। तिथि और मुहूर्त की पुष्टि के लिए आप India TV की रिपोर्ट भी देख सकते हैं।
क्या आप इस दुर्लभ अधिक मास पद्मिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं? कमेंट में बताइए कि आप पारण कल किस समय करेंगे।

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