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In-Hand सैलरी कैलकुलेटर

अपना CTC भरें और टैक्स, EPF तथा प्रोफेशनल टैक्स के बाद असली मासिक टेक-होम देखें — नई और पुरानी रेजीम, FY 2025-26 स्लैब।

ज़्यादातर ऑफर में बेसिक CTC का 35% से 50% तक रहता है
कर्नाटक और महाराष्ट्र में ₹200/माह आम है; कुछ राज्यों में नहीं लगता
मासिक in-hand सैलरी
सालाना in-hand
इनकम टैक्स + सेस (FY 2025-26)
एम्प्लॉयी PF प्रति साल
प्रभावी टैक्स दर (ग्रॉस की)

CTC बनाम ग्रॉस बनाम in-hand सैलरी

CTC (cost to company) वह सब कुछ है जो आपका एम्प्लॉयर आप पर खर्च करता है — इसमें वो पैसा भी शामिल है जो आपके बैंक खाते में कभी नहीं आता, जैसे एम्प्लॉयर का PF योगदान। ग्रॉस सैलरी CTC में से इन एम्प्लॉयर-साइड घटकों को घटाने पर मिलती है। In-hand सैलरी वही है जो हर महीने सचमुच आपके खाते में आती है: ग्रॉस में से आपका अपना EPF योगदान, इनकम टैक्स (TDS) और प्रोफेशनल टैक्स घटाने के बाद।

इसीलिए "₹12 लाख का पैकेज" कभी ₹1,00,000 महीना नहीं होता। ईमानदार सिलसिला है CTC → ग्रॉस → टैक्सेबल → in-hand, और हर तीर कुछ न कुछ घटाता है।

यह कैलकुलेटर जो सटीक मॉडल इस्तेमाल करता है

  • बेसिक सैलरी = CTC × आपका तय किया बेसिक % (डिफ़ॉल्ट 40%)।
  • एम्प्लॉयी PF = बेसिक का 12%; एम्प्लॉयर PF = बेसिक का 12%।
  • ग्रॉस सैलरी = CTC − एम्प्लॉयर PF, जब एम्प्लॉयर PF CTC के अंदर हो (आम ढांचा)। अगर आपका ऑफर PF ऊपर से जोड़ता है, तो टॉगल "नहीं" पर करें।
  • इनकम टैक्स ग्रॉस सैलरी इनकम पर, स्टैंडर्ड डिडक्शन (नई रेजीम ₹75,000 / पुरानी ₹50,000) और चुनी गई पुरानी-रेजीम कटौतियों के बाद, FY 2025-26 स्लैब, §87A रिबेट और 4% सेस सहित।
  • मासिक in-hand = (ग्रॉस − एम्प्लॉयी PF − टैक्स − प्रोफेशनल टैक्स × 12) ÷ 12।

यह मॉडल मानता है कि कोई वेरिएबल पे नहीं है और CTC के अंदर ग्रेच्युटी या इंश्योरेंस प्रोविज़न नहीं है। अगर आपके ऑफर लेटर में ये शामिल हैं, तो असली in-hand थोड़ी कम होगी — अपना CTC एनेक्सचर लाइन-दर-लाइन पढ़ें।

हल किया उदाहरण: 12 LPA in-hand (FY 2025-26)

40% बेसिक, नई रेजीम और CTC के अंदर एम्प्लॉयर PF के साथ ₹12,00,000 का CTC लें:

चरणरकम (₹ / साल)
बेसिक सैलरी (CTC का 40%)4,80,000
एम्प्लॉयर PF (बेसिक का 12%, CTC के अंदर)−57,600
ग्रॉस सैलरी11,42,400
स्टैंडर्ड डिडक्शन (नई रेजीम)−75,000
टैक्सेबल इनकम10,67,400
स्लैब टैक्स ₹46,740 − §87A रिबेट0
एम्प्लॉयी PF (बेसिक का 12%)−57,600
प्रोफेशनल टैक्स (₹200 × 12)−2,400
सालाना in-hand10,82,400
मासिक in-hand90,200

पुरानी रेजीम में ₹1,50,000 की कटौतियों के साथ वही CTC करीब ₹1,05,019 टैक्स देता है और हाथ में करीब ₹81,448 महीना — यानी यहां नई रेजीम लगभग ₹8,750 प्रति माह ज़्यादा बचाती है।

आपकी in-hand सैलरी क्या घटाता है

तीन कटौतियां लगभग सारा असर डालती हैं। EPF: आपकी ओर से बेसिक का 12%, हर महीने — ₹40,000 बेसिक पर यह ₹4,800 है (पैसा आपका ही है, बस रिटायरमेंट के लिए लॉक)। इनकम टैक्स: नई रेजीम में ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर शून्य (FY 2025-26 तक), उसके बाद तेज़ी से बढ़ता है। प्रोफेशनल टैक्स: छोटा (सालाना अधिकतम ₹2,500) पर ज़्यादातर राज्यों में हर पेस्लिप पर दिखता है।

नया लेबर कोड: आपकी बेसिक 50% तक क्यों बढ़ सकती है

नई वेज-कोड परिभाषाएं मांगती हैं कि "वेजेज़" — मोटे तौर पर बेसिक + DA — कुल वेतन का कम से कम 50% हो। जो कंपनियां आज बेसिक 30–40% रखती हैं, उन्हें कोड लागू होने पर इसे बढ़ाना होगा। ज़्यादा बेसिक का मतलब दोनों तरफ ज़्यादा PF, इसलिए मासिक in-hand थोड़ी घटती है जबकि रिटायरमेंट बचत बढ़ती है। जून 2026 तक लागू होने की समयसीमा राज्य और एम्प्लॉयर के हिसाब से अलग है — असर देखने के लिए बेसिक % स्लाइडर को 50% पर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

CTC से in-hand सैलरी कैसे निकालें?
सालाना CTC से शुरू करें, फिर एम्प्लॉयर का PF योगदान हटाएं (अगर आपकी कंपनी इसे CTC के अंदर गिनती है), उसके बाद अपना 12% EPF, अपनी रेजीम के हिसाब से इनकम टैक्स और प्रोफेशनल टैक्स घटाएं। बची रकम को 12 से भाग दें। यह कैलकुलेटर FY 2025-26 के स्लैब के साथ बिल्कुल यही चरण चलाता है।
नई टैक्स रेजीम में 12 LPA पर in-hand सैलरी कितनी होगी?
40% बेसिक और CTC के अंदर एम्प्लॉयर PF के साथ करीब ₹90,200 प्रति माह। इनकम टैक्स शून्य रहता है क्योंकि ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल इनकम (₹10,67,400) ₹12 लाख की §87A रिबेट सीमा से नीचे रहती है। पूरा ब्रेकअप हमारे 12 LPA in-hand सैलरी पेज पर देखें।
मेरी in-hand सैलरी CTC ÷ 12 से कम क्यों है?
CTC में वो चीज़ें भी होती हैं जो आपको हर महीने दिखती नहीं: एम्प्लॉयर PF, ग्रेच्युटी प्रोविज़न, इंश्योरेंस प्रीमियम और वेरिएबल पे। फिर आपकी अपनी कटौतियां — एम्प्लॉयी PF, इनकम टैक्स (TDS) और प्रोफेशनल टैक्स — ग्रॉस से कटती हैं। 12 LPA का CTC कागज़ पर ₹1,00,000 महीना है, पर हाथ में करीब ₹90,200 आता है।
FY 2025-26 में टैक्स के बाद कौन-सी रेजीम ज़्यादा सैलरी देती है?
ज़्यादातर सैलरीड लोगों के लिए नई रेजीम बेहतर है — इसमें ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर कोई टैक्स नहीं (§87A रिबेट) और ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन है। पुरानी रेजीम तभी आगे निकलती है जब आप बड़ी कटौतियां लें: पूरा 80C, बड़ा HRA छूट और होम-लोन ब्याज एक साथ। कैलकुलेटर दोनों को साथ-साथ दिखाता है।
एक ही CTC पर TCS, Infosys या Accenture में सैलरी अलग क्यों होती है?
कंपनियां CTC को अलग ढंग से बनाती हैं: बेसिक CTC का 35–50% हो सकता है, वेरिएबल पे 0–20%, और कुछ ग्रेच्युटी प्रोविज़न या इंश्योरेंस को CTC में शामिल करती हैं। ज़्यादा बेसिक का मतलब ज़्यादा PF (कम in-hand, बड़ा रिटायरमेंट कोष); ज़्यादा वेरिएबल का मतलब कम फिक्स्ड मासिक क्रेडिट। बेसिक % स्लाइडर को अपने ऑफर लेटर के हिसाब से सेट करें।
क्या प्रोफेशनल टैक्स हर राज्य में एक जैसा है?
नहीं। यह राज्य का कर है और सालाना ₹2,500 तक सीमित है। कर्नाटक और महाराष्ट्र करीब ₹200 प्रति माह काटते हैं; कुछ राज्यों (जैसे दिल्ली और हरियाणा) में यह बिल्कुल नहीं लगता। अपने राज्य के हिसाब से प्रोफेशनल-टैक्स इनपुट बदलें।
क्या नया लेबर कोड मेरी in-hand सैलरी बदलेगा?
जब वेज-कोड की परिभाषा लागू होगी, तो "वेजेज़" (बेसिक + DA) कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए। अगर आज आपकी बेसिक इससे कम है, तो वह बढ़ेगी — PF योगदान बढ़ेगा और मासिक in-hand थोड़ा घटेगा, जबकि रिटायरमेंट बचत बढ़ेगी। जून 2026 तक लागू होने की समयसीमा राज्य और एम्प्लॉयर के हिसाब से अलग-अलग है।

ये अनुमान केवल जानकारी और शिक्षा के लिए हैं — वित्तीय, टैक्स या निवेश सलाह नहीं। मौजूदा दरों और नियमों की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करें।

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